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श्री मारूती धाम — एक दिव्य संकल्प
यह केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि श्रद्धा, सेवा, सनातन संस्कृति और भक्तों की आस्था का जीवंत केंद्र बनने जा रहा है। जहाँ आने वाला प्रत्येक भक्त सकारात्मक ऊर्जा, आत्मिक शांति और भगवान का आशीर्वाद प्राप्त करेगा।
श्री मारूती धाम को केवल हनुमान मंदिर तक सीमित नहीं रखा जाएगा — यहाँ भगवान शिव, श्री राम दरबार एवं अन्य देवी-देवताओं के दिव्य मंदिर भी स्थापित किए जाएंगे।
🏛️ भगवान शिव मंदिर
🌺 श्री राम दरबार
🐄 गौसेवा केंद्र
📿 भजन-कीर्तन आयोजन
🎓 धर्म शिक्षा
🙏 भंडारा सेवा

श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर
स्वामी अनुराग पुरी जी महाराज
108 का मह
108 का महत्व
⭐ संख्या 108 का सनातन धर्म, योग और अध्यात्म में अत्यंत विशेष महत्व माना गया है।
⭐ इसी कारण जपमाला में 108 मनके होते हैं और मंत्रों का जाप भी 108 बार किया जाता है।
⭐ 1 का अर्थ है — परमात्मा, एकता और ईश्वर का स्वरूप।
⭐ 0 का अर्थ है — शून्यता, ध्यान, ज्ञान और पूर्णता का प्रतीक।
⭐ 8 का अर्थ है — अनंत (∞), सृष्टि का विस्तार और असीम चेतना।
⭐ 108 हमें ईश्वर से जुड़कर अहंकार को समाप्त करने तथा अनंत चेतना तक पहुँचने की प्रेरणा देता है।
⭐ हिंदू धर्म में 108 उपनिषदों को मान्यता प्राप्त है, जो आध्यात्मिक ज्ञान का आधार हैं।
⭐ देवी-देवताओं के 108 नामों का स्मरण और पाठ अत्यंत शुभ एवं फलदायी माना जाता है।
⭐ जपमाला के 108 मनके साधक को एकाग्रता, भक्ति और आध्यात्मिक उन्नति की ओर अग्रसर करते हैं।
⭐ आयुर्वेद में मानव शरीर के 108 प्रमुख ऊर्जा बिंदुओं (मर्म बिंदुओं) का उल्लेख मिलता है।
⭐ ज्योतिष शास्त्र में भी 108 का विशेष महत्व है, जो ब्रह्मांडीय संतुलन और दिव्य गणनाओं का प्रतीक माना जाता है।
⭐ योग परंपरा के अनुसार हृदय केंद्र से 108 प्रमुख ऊर्जा मार्ग प्रवाहित होते हैं, जो शरीर, मन और आत्मा को जोड़ते हैं।
⭐ 108 बार मंत्र जाप करने से मन शुद्ध होता है, सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है और आत्मिक शांति प्राप्त होती है।
⭐ यह पवित्र संख्या भक्ति, साधना, आत्मज्ञान और ईश्वर से जुड़ने का दिव्य मार्ग दर्शाती है।
⭐ 108 फीट ऊँची श्री हनुमान जी महाराज की भव्य प्रतिमा का निर्माण।
⭐ श्री मारुति धाम मंदिर परिसर का विकास एवं धार्मिक अधोसंरचना का निर्माण।
⭐ सनातन धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों के संरक्षण एवं प्रचार-प्रसार का कार्य।
⭐ भजन, कीर्तन, कथा, सत्संग एवं धार्मिक आयोजनों का नियमित आयोजन।
⭐ गौसेवा, धर्मसेवा एवं समाजहित से जुड़े सेवा कार्यों को बढ़ावा देना।
⭐ श्रद्धालुओं के लिए आध्यात्मिक मार्गदर्शन एवं सकारात्मक जीवन मूल्यों का प्रसार।
⭐ सभी देवी-देवताओं के पूजन एवं दर्शन हेतु पवित्र धार्मिक वातावरण का निर्माण।
⭐ युवाओं एवं आने वाली पीढ़ियों को भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक विरासत से जोड़ना।
⭐ समाज में धार्मिक जागरूकता, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का विकास करना।
⭐ श्रद्धालुओं के लिए आस्था, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का केंद्र स्थापित करना।
⭐ श्रद्धा एवं भक्ति – ईश्वर के प्रति अटूट विश्वास और समर्पण।
⭐ सेवा भाव – मानवता, समाज और धर्म की निस्वार्थ सेवा।
⭐ सत्य एवं नैतिकता – जीवन में सत्य, ईमानदारी और सदाचार को अपनाना।
⭐ करुणा एवं सहानुभूति – प्रत्येक व्यक्ति के प्रति प्रेम, सम्मान और सहयोग की भावना।
⭐ सांस्कृतिक संरक्षण – सनातन संस्कृति, परंपराओं और आध्यात्मिक धरोहर का संरक्षण।
⭐ एकता एवं सद्भाव – समाज में भाईचारा, शांति और सामंजस्य को बढ़ावा देना।
⭐ आध्यात्मिक विकास – आत्मिक उन्नति और सकारात्मक जीवन दृष्टिकोण का प्रसार।
⭐ उत्तरदायित्व – समाज, संस्कृति और आने वाली पीढ़ियों के प्रति अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन।
⭐ समर्पण – धर्म एवं सेवा कार्यों के प्रति पूर्ण निष्ठा और प्रतिबद्धता।
⭐ लोककल्याण – समाज के समग्र विकास और जनहित के लिए कार्य करना।
⭐ आप एक ऐसे दिव्य मिशन का हिस्सा बनेंगे जो 108 फीट हनुमान जी की भव्य प्रतिमा एवं श्री मारुति धाम के निर्माण से जुड़ा है।
⭐ आपके सहयोग से सनातन धर्म, संस्कृति और आध्यात्मिक मूल्यों का संरक्षण एवं प्रसार होगा।
⭐ धर्म, सेवा और समाज कल्याण के कार्यों में सक्रिय भागीदारी का अवसर प्राप्त होगा।
⭐ भक्ति, आध्यात्मिकता और सकारात्मक ऊर्जा से जुड़ने का अनूठा अनुभव मिलेगा।
⭐ मंदिर निर्माण, धार्मिक आयोजनों और सेवा कार्यों में योगदान देकर पुण्य लाभ प्राप्त कर सकेंगे।
⭐ समाज में धार्मिक जागरूकता और सांस्कृतिक मूल्यों को मजबूत बनाने में सहयोग कर सकेंगे।
⭐ श्रद्धालुओं, संतों और आध्यात्मिक समुदाय के साथ जुड़कर प्रेरणादायक वातावरण का हिस्सा बनेंगे।
⭐ आने वाली पीढ़ियों के लिए एक महान धार्मिक और सांस्कृतिक धरोहर के निर्माण में योगदान देंगे।
⭐ आपके सहयोग से हजारों श्रद्धालुओं को आस्था, शांति और आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्राप्त होगा।
⭐ यह केवल एक परियोजना नहीं, बल्कि धर्म, सेवा, संस्कृति और मानव कल्याण के लिए एक पवित्र संकल्प है।
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“मंदिर निर्माण में दिया गया दान केवल धन नहीं, बल्कि अपनी श्रद्धा को भगवान के चरणों में समर्पित करना है।”